इश्क का नज़राना

ये इश्क का नज़राना क्या मिला
ज़िन्दगी को एक बहाना फिर मिला
रात की बेचैनी हमको मिली
दिल का करार उनको मिला

ये इश्क का नज़राना क्या मिला
उनके सिवा कोई सुहाना ना मिला
मेरी रूह को इबादत का बहाना अब मिला
दुआ कबूल होने का नज़राना तू मिला

ये इश्क का नज़राना क्या मिला
तुझे प्यार करने का बहाना अब मिला
तुझे रूठ कर मानने का फसाना अब मिला
इश्क की पैच छत पर लड़ाने का बहाना अब मिला

ये इश्क का नज़राना क्या मिला
एक सुन्दर आशियाना बनाने का बहाना यूं मिला
होती थी चुपके चुपके वो मीठी मीठी बातें रात को
उस अधूरे कारवां को बढ़ाने का सहारा यूं मिला
ये इश्क का नज़राना क्या मिला
फिर से जीने का बहाना यूं मिला





Comments

Popular posts from this blog

Donating it with love

College Days

Quest of Rameshwarm